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Monday, 5 November 2018

कभी -कभी में सोचता हुँ

कभी -कभी में सोचता हुँ
ये सब क्या हो रहा हे 
जो हो रहा हे सो क्यों हो रहा हे। 
क्या जीवन -मरण हि एक सत्य हे ?
मेरा वज़ूद , मेरा सबूत ,
सब एक दिखावा हे ?
मेरा सम्बन्ध ,मेरा रिश्ता 
सब एक झूठा वादा हे। .. 
कभी -कभी मे सोचता हुँ 
मै  काल्पनिक हक़ीक़त हुँ ,
इक्षाओं और आकांक्षाओंका,
पूरा करनेवाला वसीहत हुँ। 
क्या हुँ में ?
क्या में एक वहम हुँ 
या हुँ सिर्फ सपना 
इस अपवादित संसारमे 
नहीं हे कुछ विपना 
कौन हुँ मैं  ?
मैं और मेरा ये सबूत , कुछ नहीं हे 
ये झूठा दिखावा ये वज़ूद कुछ नहीं हे 
सब महस एक कल्पना हे.... 
सब काल्पनिक हे .........        
                                       A Poem by, 
                                          Abhijeet Chaudhar

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