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Monday, 31 December 2018

एक दिन

     
एक दिन वो घड़ी आएगा 
जब कोई मेरा सुननेवाला नहीं होगा 
जब कोई मेरे लिए चिल्लानेवाला नहीं होगा। 
उस पल मै , उस समय मै 
अपवाद -विवाद से मुक्त हो जाऊँगा 
वीच भवडमे.... वीच रास्ते मे 
सबको छोड़ जाऊँगा। 
उस समय मै 
सायद किसीके भावनाओंको न देख पाऊं 
सायद किसीके बातोंको न सुन पाऊं 
सायद किसीके एह्सासोंको न महसूस कर पाऊं 
हर चीज़से विराम लूंगा .... 
अपना पहिचान ,स्वाभिमान ,सम्मान 
हर चीज़को मिटा दूंगा। 
बस् एक छोटा सा अभिलाषा रह जायेगा 
मै जो जिश लिए आया था ,
जो करने आया था 
वो पूरा न हो सका 
अधूरा रह गया..........
                                    A Poem By,
                                  ©Abhijeet Chaudhary

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